Charkhi Dadri News – हरियाणा रोडवेज संयुक्त कर्मचारी संघ 0644 ने हरियाणा सरकार की निजीकरण की नीतियों पर कड़ा विरोध जताते हुए बिजली विभाग के निजीकरण की कथित कोशिशों की निंदा की है। संघ के राज्य अध्यक्ष जगदीप लाठर व राज्य प्रवक्ता सुधीर अहलावत ने कहा कि किसी भी सरकारी विभाग का निजीकरण जनता के हितों के साथ धोखा है।
वे बिजली विभाग के कर्मचारियों के साथ खड़े हैं और विभाग को खत्म नहीं होने देंगे। सुधीर अहलावत ने कहा कि राजनीतिक पार्टियां अपने चुनावी घोषणा-पत्रों में युवाओं को पक्का रोजगार देने और सरकारी सेवाओं को मजबूत करने के वादे करती हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर इसके विपरीत स्थिति दिखाई दे रही है।
बेरोजगार युवा और विभिन्न विभागों के कर्मचारी अपनी मांगों को लेकर सड़कों पर उतरने को मजबूर हैं। उन्होंने कहा कि स्थायी रोजगार के अवसर सीमित करना और सरकारी विभागों को निजी हाथों में सौंपना कर्मचारियों व युवाओं के भविष्य के लिए चिंता का विषय है। उन्होंने कहा कि हरियाणा में बिजली वितरण व्यवस्था में निजी कंपनियों की भागीदारी बढ़ाने की दिशा में कदम उठाए जा रहे हैं।
उनके अनुसार, एलेवन पावर प्राइवेट लिमिटेड को लेकर हरियाणा विद्युत विनियामक आयोग में सरकारी बिजली वितरण कंपनियों के समानांतर नेटवर्क तैयार करने और लाइसेंस देने की प्रक्रिया पर सवाल उठ रहे हैं। इसकी शुरुआत गुरुग्राम व नूंह से होने की बात कही जा रही है। उन्होंने आशंका जताई कि यदि इस दिशा में आगे कदम बढ़ाए गए तो भविष्य में इसका विस्तार प्रदेश के अन्य क्षेत्रों तक हो सकता है।
सुधीर अहलावत ने कहा कि अगस्त में बिजली कर्मचारियों ने अपनी मांगों को लेकर आंदोलन किया था। उस समय सरकार की ओर से मांगों पर विचार करने के लिए दो महीने का समय मांगे जाने की बात सामने आई थी, लेकिन अब कर्मचारियों की चिंताएं और बढ़ गई हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि जब सरकारी विभाग बेहतर ढंग से काम कर रहे हैं तो उन्हें निजी हाथों में सौंपने की जरूरत क्यों पड़ रही है? निजीकरण से पहले से कार्यरत कर्मचारियों के भविष्य और आम जनता को मिलने वाली सेवाओं पर पड़ने वाले प्रभावों को भी ध्यान में रखा जाना चाहिए।
उन्होंने हरियाणा रोडवेज का उदाहरण देते हुए कहा कि किलोमीटर स्कीम और निजी इलेक्ट्रिक बसों के माध्यम से परिवहन क्षेत्र में भी निजी भागीदारी बढ़ी है। संघ का मानना है कि इस तरह की नीतियों से सरकारी विभागों में रोजगार के अवसर प्रभावित हो सकते हैं और स्थायी रोजगार के स्थान पर अस्थायी रोजगार को बढ़ावा मिल सकता है।
हरियाणा रोडवेज संयुक्त कर्मचारी संघ 0644 ने निजीकरण की नीतियों का विरोध करते हुए कहा कि संघ बिजली विभाग के कर्मचारियों के आंदोलन का समर्थन करने के संबंध में जल्द फैसला लेगा। उन्होंने सरकार से सरकारी विभागों को मजबूत करने, कर्मचारियों के हितों की रक्षा करने और युवाओं के लिए स्थायी रोजगार के अवसर सुनिश्चित करने की मांग की।
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