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चरखी दादरी: परसराम हेतराम स्कूल में गांधी-शास्त्री जयंती, विद्यार्थियों ने लिया सत्य-अहिंसा का संकल्प

Charkhi Dadri News – गांधी के विचार बने प्रेरणा, परसराम हेतराम स्कूल में विद्यार्थियों ने लिया सत्य-अहिंसा का संकल्प— डॉ. पवन बुवानीवाला
परसराम हेतराम स्कूल, चरखी-दादरी में राष्ट्रपिता महात्मा गांधी एवं देश के पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री की जयंती श्रद्धा, सम्मान और प्रेरणादायक वातावरण में मनाई गई। इस अवसर पर विद्यालय परिसर में दोनों महान विभूतियों के चित्रों पर पुष्प अर्पित कर उन्हें श्रद्धांजलि दी गई। विद्यार्थियों ने उनके जीवन, संघर्ष, देशसेवा और आदर्शों से प्रेरणा लेते हुए अपने विचार प्रस्तुत किए।

Charkhi Dadri News


कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों को महात्मा गांधी के सत्य, अहिंसा, सादगी और स्वच्छता के संदेश तथा लाल बहादुर शास्त्री के ईमानदारी, सादगी, अनुशासन और राष्ट्रसेवा के आदर्शों से परिचित करवाया गया। विद्यार्थियों ने दोनों महान नेताओं के जीवन से प्रेरणा लेते हुए देश और समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारियों को समझने का संकल्प लिया।
विद्यालय के अध्यक्ष डॉ. पवन बुवानीवाला जी ने कहा कि महात्मा गांधी और लाल बहादुर शास्त्री भारत की महान विरासत के ऐसे प्रेरणास्रोत हैं, जिनका जीवन आने वाली पीढ़ियों को हमेशा दिशा देता रहेगा। गांधी जी ने सत्य और अहिंसा के माध्यम से मानवता को नई राह दिखाई, वहीं शास्त्री जी ने सादगी, ईमानदारी और कर्तव्यनिष्ठा से देशसेवा का आदर्श प्रस्तुत किया। विद्यार्थियों को इन दोनों महापुरुषों के जीवन मूल्यों को अपने आचरण में उतारने का प्रयास करना चाहिए।


प्रधानाचार्य श्री ओ.पी. तिवारी जी ने कहा कि गांधी जयंती और शास्त्री जयंती हमें अपने महान नेताओं के आदर्शों को याद करने के साथ-साथ उन्हें जीवन में अपनाने की प्रेरणा देती हैं। उन्होंने कहा कि गांधी जी का सत्य और अहिंसा का मार्ग तथा शास्त्री जी की सादगी और कर्तव्यनिष्ठा विद्यार्थियों के व्यक्तित्व निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। उन्होंने विद्यार्थियों से अनुशासन, स्वच्छता, ईमानदारी और राष्ट्र के प्रति जिम्मेदारी की भावना विकसित करने का आह्वान किया।
हिंदी अध्यापिका श्रीमती सोनू राणा ने कहा कि महात्मा गांधी और लाल बहादुर शास्त्री का जीवन विद्यार्थियों के लिए प्रेरणा की जीवंत पाठशाला है। गांधी जी ने हमें सत्य और अहिंसा की शक्ति का पाठ पढ़ाया, जबकि शास्त्री जी ने अपने सरल जीवन और कर्मों से यह दिखाया कि महान बनने के लिए दिखावे की नहीं, बल्कि अच्छे विचारों और श्रेष्ठ आचरण की आवश्यकता होती है। उन्होंने विद्यार्थियों को दोनों महापुरुषों के आदर्शों को अपने दैनिक जीवन में अपनाने के लिए प्रेरित किया।


कार्यक्रम के अंत में विद्यार्थियों ने सत्य, अहिंसा, स्वच्छता, सादगी, ईमानदारी, अनुशासन और राष्ट्रसेवा के मूल्यों को जीवन में अपनाने का संकल्प लिया। विद्यालय परिवार ने दोनों महान विभूतियों को नमन करते हुए उनके आदर्शों को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का संदेश दिया।

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