Charkhi Dadri News – स्थानीय विद्या विहार शंकर कालोनी में चल रहे 10वें श्री गणेश जन्मोत्सव के छठे दिन राधा अष्टमी के पावन अवसर पर श्रद्धा, भक्ति, संस्कृति और आध्यात्मिक चेतना का अद्भुत संगम देखने को मिला। श्री गणेश महाराज की संगीतमय आरती एवं विधिवत पूजा-अर्चना के साथ कार्यक्रम का शुभारंभ हुआ। पंडाल में गूंजे गणपति बप्पा मोरया के जयघोष ने वातावरण को भक्तिमय बना दिया। आयोजन का विशेष आकर्षण श्री कृष्ण की प्रियतम राधा रानी सजाओ प्रतियोगिता रही, जिसमें नन्हे-मुन्ने बच्चों ने राधा रानी के स्वरूप में सजकर धार्मिक भजनों पर भावपूर्ण नृत्य प्रस्तुत किया।
Charkhi Dadri News – बच्चों की मासूमियत, भक्ति और मनमोहक प्रस्तुतियों ने उपस्थित श्रद्धालुओं का मन जीत लिया। प्रतियोगिता में प्रथम, द्वितीय एवं तृतीय स्थान प्राप्त प्रतिभागियों को पुरस्कार देकर सम्मानित किया गया, जबकि अन्य सभी प्रतिभागियों को सांत्वना पुरस्कार प्रदान किए गए। कार्यक्रम में बतौर यजमान कृष्ण कुमार मकडानिया उपस्थित रहे। इस अवसर पर अर्जुन लाल भक्त ने राधा अष्टमी के आध्यात्मिक महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि राधा अष्टमी श्री राधा रानी के प्राकट्य उत्सव के रूप में मनाई जाती है। भक्ति परंपरा में श्री राधा को भगवान श्रीकृष्ण की प्रेम, भक्ति और शक्ति का स्वरूप माना गया है। उन्होंने कहा कि श्रीकृष्ण की आराधना में राधा तत्व का विशेष महत्व है और राधा नाम प्रेम, समर्पण तथा निष्काम भक्ति का संदेश देता है।
Charkhi Dadri News – उन्होंने बताया कि राधा अष्टमी का पावन पर्व भगवान श्री कृष्ण की प्रियतम राधा रानी जी के प्रकटोत्सव (जन्मदिन) के रूप में भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि को मनाया जाता है। यह पर्व कृष्णअष्टमी के ठीक 15 दिन बाद मनाया जाता है। महाराज वृषभानु को यज्ञ भूमि की सफाई के समय मध्याह्न (दोपहर) काल में राधा रानी प्रकट रूप में मिली थी। राधा रानी की साश्रव्त शक्तिस्वरुपा एवं प्राणों की अधिष्ठात्री देवी के रूप में वर्णित है। इसलिए राधा जी की पूजा के बिना श्री कृष्ण जी की पूजा अधुरी मानी जाती है। यह सम्पूर्ण कामनाओं का (राधन) साधन करती है इसलिए इन्हें श्रीराधा कहते है। कार्यक्रम में अमीत आर्ट ग्रुप, भिवानी के कलाकारों ने श्री राधा-कृष्ण के स्वरूप में महारास एवं धार्मिक-सांस्कृतिक झांकी की मनमोहक प्रस्तुति देकर श्रद्धालुओं को भावविभोर कर दिया।
भजनों की मधुर धुन पर पंडाल में मौजूद मातृशक्ति भी भक्ति में झूम उठी। वहीं वृंदावन से पहुंचे प्रसिद्ध कथा वाचक मोहन श्याम पारासर ने संगीतमय आध्यात्मिक प्रसंगों के माध्यम से श्रद्धालुओं को भक्ति और ज्ञान का रसपान करवाया। मंच संचालन रामौतार सर्राफ ने किया। कार्यक्रम के दौरान श्रद्धालुओं ने श्रीकृष्ण एवं श्री राधा रानी के जयकारों से वातावरण को गुंजायमान कर दिया। देर रात तक पूरा पंडाल भक्ति, संगीत और आध्यात्मिक ऊर्जा से सराबोर रहा। आयोजन ने यह संदेश दिया कि जब संस्कारों की नींव बचपन से मजबूत होती है, तो संस्कृति केवल मंच पर दिखाई नहीं देती, बल्कि आने वाली पीढि़यों के जीवन का हिस्सा बन जाती है।
आज के आयोजन में बलराज फौगाट, कृष्ण मकडानिया, संजय बंसल, रणवीर सिंह अहलावत, दिनेश शास्त्री, दीपचंद पलवल, अर्जुन लाल, दीपक डागर, रामौतार सरार्फ, सतीश बजाज, प्रवीण मित्तल, प्रकाशित चंद समसपुरिया, हीरा लाल समसपुरिया, राजेश आदमपुरिया, जयभगवान मित्तल, विष्णु गोयल, साहिल गुप्ता, राजकुमार मित्तल, पवन पिंटू समसपुरिया, श्रीभगवान, सुधीर खुडानिया, सोनम, रुचि, आशा, कुशुम, सीमा, ममता, मंजु, हेमा, रीना, मोतिया इत्यादि अनेक उपस्थित थे।
Read More….
चरखी दादरी में हथियारों का सप्लायर गिरफ्तार, खरकड़ी झाँवरी (जिला भिवानी) निवासी युवक
