Charkhi Dadri News -राज्य सरकार द्वारा राजस्व सेवाओं को सरल, पारदर्शी, समयबद्ध एवं तकनीक आधारित बनाने की दिशा में ऑटो म्यूटेशन व्यवस्था लागू की जा रही है। इस व्यवस्था का उद्देश्य इंतकाल प्रक्रिया को सुगम बनाने के साथ-साथ आम नागरिकों को अनावश्यक रूप से तहसील कार्यालयों के चक्कर लगाने से राहत देना तथा राजस्व व्यवस्था में जवाबदेही सुनिश्चित करना है
राजस्व विभाग की इस व्यवस्था के बारे में उपायुक्त मनदीप कौर ने बताया है कि रजिस्ट्री के बाद म्यूटेशन को निर्धारित समय-सीमा में विभिन्न स्तरों पर प्रोसेस किया जाता है। पहले चार दिन म्यूटेशन पटवारी के लॉगिन में रहेगी। यदि इस अवधि में आवश्यक कार्रवाई नहीं होती है तो पांचवें दिन यह स्वत: कानूनगो के लॉगिन में फॉरवर्ड हो जाएगी। इसके बाद निर्धारित समय में कार्रवाई न होने पर म्यूटेशन स्वत: सीआरओ के लॉगिन में जाएगी और निर्धारित अवधि के बाद भी कार्रवाई नहीं होने पर 11वें दिन म्यूटेशन जमाबंदी में स्वत: शामिल हो जाएगी। इस व्यवस्था से यह सुनिश्चित होगा कि म्यूटेशन किसी एक स्तर पर अनावश्यक रूप से लंबित न रहे और प्रत्येक स्तर पर समयबद्ध कार्रवाई एवं जवाबदेही तय हो।
उन्होंने बताया है कि सरकार द्वारा नागरिकों के लिए विशेष ऑनलाइन शिकायत निवारण व्यवस्था भी शुरू की जाएगी। इसके माध्यम से नागरिक निर्धारित समय-सीमा में प्रोसेस न हुई म्यूटेशन से संबंधित शिकायत दर्ज कर सकेंगे और आवश्यक दस्तावेज ऑनलाइन जमा कर सकेंगे। संबंधित विभाग या अधिकारी द्वारा शिकायत पर 10 दिनों के भीतर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। यदि नियमों के अनुसार म्यूटेशन की जा सकती है तो नागरिक को उसकी प्रति उपलब्ध कराई जाएगी। वहीं, यदि म्यूटेशन किसी कारणवश नहीं हो सकती तो संबंधित सीआरओ द्वारा स्पष्ट कारणों के साथ स्पीकिंग ऑर्डर जारी किया जाएगा। राजस्व सेवाओं को अधिक से अधिक डिजिटल माध्यम से नागरिकों तक पहुंचाने पर जोर दिया जा रहा है।
जमाबंदी, म्यूटेशन, डिजिटल साइन की गई रजिस्ट्री तथा अन्य राजस्व रिकॉर्ड ऑनलाइन उपलब्ध कराने की दिशा में कार्य किया जा रहा है। साथ ही जमाबंदी में व्यक्ति के हिस्से की जानकारी ऑनलाइन उपलब्ध कराने, छोटी-छोटी शुद्धि को सरल बनाने तथा तकसीम जैसी प्रक्रियाओं को अधिक पारदर्शी एवं समयबद्ध बनाने पर भी जोर दिया जा रहा है।
उन्होंने सभी संबंधित अधिकारियों एवं कर्मचारियों को निर्धारित समय-सीमा में आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं ताकि नागरिकों को अपने कार्यों के लिए अनावश्यक रूप से कार्यालयों के चक्कर न लगाने पड़ें। उन्होंने कहा कि डिजिटलीकरण का उद्देश्य किसी अधिकारी या कर्मचारी को परेशान करना नहीं, बल्कि व्यवस्था को बेहतर बनाना, जवाबदेही तय करना, पारदर्शिता बढ़ाना और नागरिकों को समय पर सेवाएं उपलब्ध कराना है। नई व्यवस्था के प्रारंभिक चरण में यदि किसी अधिकारी या कर्मचारी के सामने वास्तविक तकनीकी अथवा संचालन संबंधी समस्या आती है या कोई सकारात्मक सुझाव है, तो उसे उचित माध्यम से विभाग के संज्ञान में लाया जा सकता है, ताकि उसका शीघ्र समाधान किया जा सके।
सरकार का लक्ष्य स्पष्ट है कि राजस्व सेवाओं में मानवीय हस्तक्षेप कम हो, पारदर्शिता बढ़े, सेवाएं निर्धारित समय में मिलें और आम नागरिक को बिना अनावश्यक चक्कर लगाए उसका अधिकार प्राप्त हो।
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