Charkhi Dadri News – डॉ. सुरेंद्र ने भाषा विषय के महत्व पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि भाषा न केवल अभिव्यक्ति का माध्यम है, बल्कि यह हमारे व्यक्तित्व का आईना भी होती है। इसलिए विद्यार्थियों को अपनी भाषा और संवाद शैली को हमेशा प्रभावशाली और विनम्र बनाए रखना चाहिए।
इसके साथ ही, उन्होंने विद्यार्थियों के जीवन में संस्कारों के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि बिना संस्कारों के शिक्षा अधूरी है। बड़ों का सम्मान करना, अनुशासित रहना और नैतिक मूल्यों को अपनाना ही सच्चे विद्यार्थी के लक्षण हैं। डॉ. सुरेंद्र ने विद्यार्थियों के भीतर छुपे गुणों और क्षमताओं को पहचानकर उन्हें निखारने पर भी बल दिया।
कार्यक्रम के अध्यक्ष रविंद्र सांगवान ने मुख्य अतिथि डॉ. सुरेंद्र का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के ज्ञानवर्धक व्याख्यान विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास में मील का पत्थर साबित होते हैं। उन्होंने विद्यार्थियों को निरंतर आगे बढ़ने और वैज्ञानिक दृष्टिकोण अपनाने के लिए प्रेरित करते हुए कहा कि किताबी ज्ञान के साथ-साथ व्यावहारिक ज्ञान और नैतिक मूल्य भी बेहद जरूरी हैं।
इस अवसर पर चित्रकलां अध्यापिका राजेश देवी, डीपीई सुरेश कुमार, अनिल रावलधी सहित स्कूल समस्त और विद्यार्थी मौजूद रहे।
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