Charkhi Dadri News : चरखी दादरी। शहर के हीरा चौक के पास स्थित लगभग 400 साल पुराने ऐतिहासिक श्यामसर तालाब को सांस्कृतिक विरासत और पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित किए जाने की संभावनाओं को झटका लगा है।
तालाब और उसके आसपास मौजूद पुराने मंदिरों, घाटों तथा धार्मिक स्थलों को संरक्षित करते हुए इसे सांस्कृतिक धरोहर घोषित करने का प्रस्ताव फिलहाल स्वीकार नहीं किया गया है।
हरियाणा पुरातत्व विभाग के निदेशक ने श्यामसर तालाब क्षेत्र का निरीक्षण किया था।
निरीक्षण के दौरान पाया गया कि तालाब के किनारे बने कई प्राचीन मंदिरों की स्थिति ऐसी नहीं है कि उनका नवीनीकरण किया जा सके।
इसी कारण अब विभाग केवल तालाब के सौंदर्यकरण पर ध्यान देगा।
पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने की थी योजना
करीब वर्ष 1700 के आसपास बने श्यामसर तालाब को शहर की ऐतिहासिक और धार्मिक पहचान का महत्वपूर्ण केंद्र माना जाता है।
यह स्थान लोगों की आस्था से भी जुड़ा हुआ है। तालाब के चारों ओर 20 से अधिक पुराने मंदिर, घाट, कुएं और धर्मशालाएं स्थित हैं, जो कभी धार्मिक और सामाजिक गतिविधियों के प्रमुख केंद्र रहे हैं।
योजना यह थी कि इन स्थलों का पुनर्विकास कर पर्यटन को बढ़ावा दिया जाए और शहर को नई पहचान मिले।
हालांकि लंबे समय तक रखरखाव न होने के कारण अधिकांश संरचनाएं बुरी तरह जर्जर हो चुकी हैं और खंडहर जैसी स्थिति में पहुंच गई हैं। ऐसे में उनका पुनर्निर्माण संभव नहीं माना गया।
नगर परिषद से पुरातत्व विभाग को सौंपा गया था जिम्मा
पूर्व मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने 18 सितंबर 2016 को श्यामसर तालाब के जीर्णोद्धार की घोषणा की थी।
इसके बाद नगर परिषद ने पहले चरण में लगभग 7 करोड़ रुपये खर्च कर कार्य शुरू किया।
हालांकि स्थानीय लोगों ने प्राचीन स्वरूप से छेड़छाड़ का आरोप लगाते हुए इसका विरोध किया था।
बाद में मनदीप बैरी ने पुरातत्व विभाग के अधिकारियों से निरीक्षण करवाया।
निरीक्षण के बाद टीम ने इसे पुरातत्व विभाग के अधीन करने की सिफारिश की थी।
लगभग एक वर्ष पहले तालाब की देखरेख का दायित्व नगर परिषद से हटाकर हरियाणा पुरातत्व एवं संग्रहालय विभाग को सौंप दिया गया था।
इसी क्रम में विभाग के निदेशक नरेंद्र पसमार ने भी स्थल का निरीक्षण कर स्थिति का आकलन किया।
वर्ष 2021 में मंदिर का हिस्सा तालाब में गिरा था
तालाब के सौंदर्यकरण कार्य के दौरान वर्ष 2021 में तालाब किनारे स्थित ऐतिहासिक श्री श्याम बहादुर मंदिर का बड़ा भाग ढह गया था।
दोपहर के समय मंदिर की तालाब की ओर बनी दीवार अचानक गिरकर पानी में समा गई थी।
करीब तीन घंटे के दौरान मंदिर का मलबा दो बार तालाब में गिरा था।
निरीक्षण में यह भी सामने आया कि तालाब के आसपास स्थित कई पुराने मंदिरों के ढांचे पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो चुके हैं।
अधिकांश मंदिरों में अब मूर्तियां भी मौजूद नहीं हैं।
कुछ स्थानों पर पुराने मंदिरों की जगह नए निर्माण कर दिए गए हैं, जिससे उनकी मूल ऐतिहासिक पहचान प्रभावित हुई है।
कई झरोखे भी टूट चुके हैं और मंदिरों के हिस्से तालाब में समा चुके हैं। ऐसे हालात में इन संरचनाओं को संरक्षित रखना संभव नहीं माना गया है।
हरियाणा पुरातत्व एवं संग्रहालय विभाग। के निदेशक डॉ. नरेंद्र पसमार, ने एक अखबार को जानकारी देते हुए बताया कि जल्द ही श्यामसर तालाब का दोबारा निरीक्षण किया जाएगा और मौजूदा स्थिति का मूल्यांकन कर आगे की योजना तैयार की जाएगी।
उन्होंने बताया कि चारदीवारी के संबंध में निर्देश मिले थे, लेकिन वहां पहले से ही चारदीवारी बनी हुई है।
अब पुनः निरीक्षण के बाद सौंदर्यकरण की आगामी योजना तैयार की जाएगी।
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