jhajjar News – एच.डी. पब्लिक स्कूल बिरोहड़ में शिक्षक दिवस समारोह का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ विशिष्ट अतिथि जिला शिक्षा अधिकारी राजबाला फौगाट, निदेशक बलराज फौगाट और प्राचार्या नमिता दास ने सर्वपल्ली डॉ राधा कृष्णन के चित्र के समक्ष पुष्प अर्पित करके किया।
इसके पश्चात विद्यार्थियों ने भावपूर्ण गुरु वंदना प्रस्तुत की। गुरु के प्रति श्रद्धा और सम्मान से ओत-प्रोत इस प्रस्तुति ने उपस्थित सभी लोगों को भावविभोर कर दिया। विद्यार्थियों ने अपनी प्रस्तुतियों के माध्यम से गुरु-शिष्य परंपरा की महत्ता को रेखांकित करते हुए बताया कि शिक्षक केवल पाठ्यक्रम का ज्ञान प्रदान नहीं करते, बल्कि विद्यार्थियों के व्यक्तित्व, संस्कार और भविष्य के निर्माण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
समारोह के दौरान विद्यार्थियों ने विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रमों, कविताओं एवं भाषणों के माध्यम से शिक्षकों के प्रति अपनी भावनाएँ व्यक्त कीं। मनमोहक सांस्कृतिक प्रस्तुतियों से कार्यक्रम स्थल पर उत्साह और उमंग का वातावरण बना रहा। विद्यार्थियों द्वारा प्रस्तुत कविताओं में गुरु की महिमा, त्याग, समर्पण और मार्गदर्शन को प्रभावशाली ढंग से अभिव्यक्त किया गया। भाषणों के माध्यम से विद्यार्थियों ने शिक्षकों को राष्ट्र निर्माण का आधार बताते हुए उनके प्रति कृतज्ञता व्यक्त की।
इस अवसर पर विद्यालय के निदेशक बलराज फौगाट ने सभी शिक्षकों को शिक्षक दिवस की शुभकामनाएँ देते हुए कहा कि शिक्षक समाज के निर्माता होते हैं। विद्यार्थियों के चरित्र निर्माण और उन्हें जिम्मेदार नागरिक बनाने में शिक्षकों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने शिक्षकों के समर्पण और परिश्रम की सराहना करते हुए कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल अच्छे अंक प्राप्त करना नहीं, बल्कि संस्कारवान और संवेदनशील व्यक्तित्व का निर्माण करना है।
विद्यालय की प्राचार्या नमिता दास ने भी सभी शिक्षकों को शिक्षक दिवस की शुभकामनाएँ दीं। उन्होंने कहा कि शिक्षक अपने ज्ञान, अनुभव और संस्कारों के माध्यम से विद्यार्थियों को जीवन की सही दिशा प्रदान करते हैं। उन्होंने विद्यार्थियों की प्रस्तुतियों की सराहना करते हुए उन्हें अपने शिक्षकों का सम्मान करने और उनके मार्गदर्शन को जीवन में अपनाने के लिए प्रेरित किया।
समारोह के अंत में विद्यालय के समस्त शिक्षकों ने विद्यार्थियों का उत्साहवर्धन किया और उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की। कार्यक्रम ने गुरु-शिष्य के पवित्र संबंध, सम्मान और संस्कारों का प्रभावशाली संदेश प्रस्तुत करते हुए सभी के मन पर अमिट छाप छोड़ी।
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“जो हिटलर की चाल चलेगा, वो कुत्ते की मौत मरेगा” के नारों से गूंज उठा शहर।

