30 जून को मिर्च गांव में होगा रात्री ठहराव

 

 मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के निर्देशों पर उपायुक्त मुनीश शर्मा और पुलिस अधीक्षक

अर्श वर्मा सहित प्रशासनिक अधिकारियों का रात्री ठहराव अब सोमवार 30 जून

को मिर्च गांव के समारोह स्थल पर होगा। इस दौरान गांव की समस्याओं को सुना

जाएगा और उनका समाधान भी किया जाएगा। साथ ही गांव के विकास को लेकर

लोगों के सुझाव भी लिए जाएंगे।

2). :-       डायरिया रोको अभियान को सफलता के साथ करें पूरा , डायरिया के कारण हो सकती है बच्चों में मृत्यु भी

स्वास्थ्य विभाग द्वारा आगामी 31 जुलाई तक चलाए जा रहे डायरिया रोको

अभियान के दौरान अभिभावकों को लेकर लोगों को जागरूक किया जाए कि डायरिया

बच्चों को लिए कितना खतरनाक है और इससे बच्चों की मृन्यू तक हो सकती है।
उपायुक्त मुनीश शर्मा ने अभियान को लेकर निर्देश दिए हैं कि डायरिया के

शुरूआती लक्षणों को पहचानने व इसके उपचार में मदद के लिए अभिभावकों को

अभियान के तहत जागरूक किया जाए।

 

 

 

 

 

स्वास्थ्य विभाग द्वारा घर-घर ओआरएस के

पैकेट निशुल्क वितरित किए जाएं तथा आंगनबाड़ी केंद्रों पर ओआरएस डिपो बनाए जाएं।

डायरिया बच्चों में होने वाली आम बिमारी है, जो छोटे बच्चों के लिए जानलेवा भी हो सकती है।

स्वास्थ्य विभाग द्वारा बच्चों में डायरिया से होने वाली मौत को रोकने के दृष्टिगत यह अभियान चलाया जा रहा है।

उन्होंने शिक्षा विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिए कि वे ग्रीष्मकालीन अवकाश के बाद दोबारा स्कूल

खुलने पर प्रार्थना सभाओं में बच्चों को उचित तरीके से हाथ धोने बारे जागरूक करें ताकि सफाई रखकर

बीमारियों से बचा जा सके। इस अभियान में स्वास्थ्य विभाग के अलावा पंचायती राज, शिक्षा विभाग व अन्य

संबंधित विभागों का पूर्ण सहयोग रहेगा।

 

 

 

3)  :-       मुख्यमंत्री विवाह शगुन योजना का उठाएं लाभ

– आर्थिक रूप से कमजोर सभी वर्गों के लिए सरकार का अहम कदम

 

हरियाणा सरकार द्वारा समाज के सभी वर्गों की बेटियों और दिव्यांगजन की शादी में

आर्थिक सहयोग प्रदान करने के उद्देश्य से मुख्यमंत्री विवाह शगुन योजना संचालित

की जा रही है। यह योजना आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों को सशक्त बनाने और

बेटियों के विवाह के लिए प्रोत्साहन देने का एक सराहनीय प्रयास है।

 

 

उपायुक्त मुनीश शर्मा ने बताया कि मुख्यमंत्री विवाह शगुन योजना समाज में

समानता और सशक्तिकरण का प्रतीक है। इस योजना का उद्देश्य आर्थिक

रूप से कमजोर परिवारों को सहायता प्रदान करना और बेटियों की शादी

में आर्थिक चिंताओं को कम करना है। उन्होंने सभी पात्र परिवारों से अपील

की है कि वे इस योजना का लाभ उठाएं और अपनी बेटियों के भविष्य को सुरक्षित और खुशहाल बनाएं।

 

 

 

 

उन्होंने कहा कि इस योजना के तहत लाभार्थियों को सहायता राशि प्रदान की जाती

है, जिसमें अनुसूचित जाति, विमुक्त जाति / टपरीवास जाति के लाभार्थियों

(जिनकी वार्षिक आय 1.80 लाख रुपये तक हो) की बेटियों के विवाह पर 71

हजार रूपए अनुदान राशि प्रदान की जाती है और पिछड़े वर्ग और सामान्य

वर्ग के व्यक्तियों (जिनकी वार्षिक आय 1.80 लाख रुपये तक हो) की बेटियों

के विवाह पर 41 हजार रूपए अनुदान राशि दी जाती है।

 

 

 

उपायुक्त ने कहा सभी वर्गों की विधवा, अनाथ, तलाकशुदा, बेसहारा महिलाओं

और उनके बच्चों की बेटियों की शादी के लिए 51 हजार रूपए अनुदान राशि

प्रदान की जाती है। खिलाड़ी महिलाओं (जिनकी वार्षिक आय 1.80 लाख रुपये तक हो)

की शादी के लिए भी 41 हजार रूपए की सहायता राशि दी जाती है। इसके साथ-साथ

इस योजना के तहत यदि विवाह में दोनों वर-वधू दिव्यांग हैं, तो उन्हें 51 हजार रूपए

अनुदान राशि दी जाएगी। अगर केवल एक वर या वधू दिव्यांग है, तो 41 हजार की

अनुदान राशि दी जाएगी।

 

 

 

उन्होंने बताया कि इस योजना का लाभ प्राप्त करने के लिए आवेदक को अपनी बेटी के

विवाह के बाद 6 माह के भीतर विवाह पंजीकरण करवाना अनिवार्य है। योजना के

लिए आवेदन प्रक्रिया को सरल और सुगम बनाया गया है। आवेदक

शादी.ईदिशा.जीओवी.आईएन पोर्टल पर जाकर विवाह पंजीकरण

और मुख्यमंत्री विवाह शगुन योजना के लिए आवेदन कर सकते है। उन्होंने

कहा कि सरकार की योजनाओं का लाभ हर पात्र व्यक्ति तक पहुंचाना जिला

प्रशासन की प्राथमिकता है।

 

 

 

 

 

4) :-  युवाओं और स्वयं सहायता समूहों को मछली पालन के लिए जागरूक करें

 

 

 

उपायुक्त मुनीश शर्मा ने मत्स्य पालन विभाग के अधिकारियों को निर्देश

दिए हैं कि वे युवाओं के साथ-साथ स्वयं सहायता समूहों को भी मछली

पालन के प्रति जागरूक करें, जो कि सरकार की प्राथमिकता है।

सरकार द्वारा मछली पालन के लिए सब्सिडी दी जा रही है।

 

 

 

उन्होंने कहा कि मछली पालन को बढ़ावा देने के लिए प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा

योजना चलाई गई है, जिसके बड़े सकारात्मक परिणाम देखने को मिल रहे हैं।

योजना के तहत सामान्य वर्ग के लोगों की कुल इकाई लागत का 40 प्रतिशत

और अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और महिला लाभार्थियों को 60

प्रतिशत अनुदान दिया जाता है। लोगों को इन योजनाओं की जानकारी देने

के लिए जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाएं।

 

 

 

मत्स्य अधिकारी ने बताया कि सरकार के निर्देशानुसार आमदनी बढ़ाने के लिए

स्वयं सहायता समूहों व बेरोजगार युवाओं को मछली पालन के प्रति

जागरूक किया जाएगा। जलभराव और अयोग्य खेती भूमि पर मछली पालन के

लिए जोर दिया जाएगा। विभाग का प्रमुख लक्ष्य जिला में मछली पालन के क्षेत्र

 

को अधिक से अधिक बढ़ाना है।

 

 

 

 

राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (हृष्ठक्रस्न) की टीम ने   में जलभराव संभावित क्षेत्रों का दौरा किया

 

 

 

 

 

जिले में आगामी मानसून को देखते हुए राष्ट्रीय आपदा मोचन बल

(हृष्ठक्रस्न) की टीम ने आज मेजर शहाबुद्दीन के नेतृत्व में विभिन्न गांवों में

जलभराव संभावित क्षेत्रों का दौरा किया। यह संयुक्त निरीक्षण सिंचाई विभाग के

अधिकारियों और कर्मचारियों के साथ मिलकर किया गया,  जिसमें विभिन्न गांव

जैसे की चरखी, साहुवास, बीरही कला ,निमड़ी, बोंद, रावलधी , मिर्च, मिस्री कमोद,

जयश्री, इमलोटा,  सहित अन्य गांव शामिल रहे।
निरीक्षण के दौरान टीम ने बाढ़ प्रबंधन की तैयारियों का गहन अवलोकन किया,

जिसमें पंपों की स्थापना, उपकरणों की उपलब्धता और जल निकासी व्यवस्था

का विशेष रूप से मूल्यांकन किया गया।

 

 

सिंचाई विभाग के कार्यकारी अभियंता श्री वेदपाल सांगवान ने जानकारी दी कि

जिले के विभिन्न गांव में अब तक लगभग 65 स्थायी फ्लड पंप साइट्स पर लगभग

103 विभिन्न क्षमता के वीटी पंप (30/50 ॥क्क) स्थापित किए जा चुके हैं। इसके

साथ इन सभी साइटों के तथा अन्य क्रिटिकल फ्लड साइटों के बिजली कनेक्शन

बिजली विभाग को आवेदित कर दिये गए है। एनडीआरएफ की टीम के साथ

सिंचाई विभाग के अधिकारियों एवं कर्मचारियों ने पंप स्थापित साइटों पर संयुक्त  दौरा किया।

 

 

 

सिंचाई विभाग ने मानसून के मध्यनजर यह भी अवगत कराया कि लगभग 150 मूवेबल

विद्युत चालित तथा डीजल चालित पंप सेट चालू हालत में विभाग के पास उपलब्ध हैं

जो की मानसून के दौरान जरूरत अनुसार अलग-अलग साइटों पर स्थापित किए जाएंगे।

इसके अलावा उन्होंने यह भी अवगत कराया कि मुख्यालय के आदेशानुसार गांव के

आबादी क्षेत्र एवं तालाबों का वर्षा ऋतु से पहले व वर्षा ऋतु दौरान जल निकासी का

कार्य बीडीपीओ एवं ग्राम पंचायत द्वारा किया जाना है

 

 

 

 

 

 

जिसके लिए जरूरत पडऩे पर पंप व मोटर सिंचाई विभाग द्वारा उपलब्ध करवाए जाते हैं उन्होंने बताया कि जिले की

सभी  ड्रेनों की सफाई का कार्य पूरा कर लिया गया है, ताकि बरसाती पानी की त्वरित

निकासी सुनिश्चित की जा सके द्य कार्यकारी अभियंता द्वारा सिंचाई विभाग के एस.डी.ओ./जे.ई. को

यह दायित्व सौंपा गया है कि वे संभावित जलभराव वाले गांवों के सरपंचों से नियमित संपर्क में रहें,

ताकि मानसून के दौरान यदि कहीं जलभराव की स्थिति उत्पन्न हो, तो तुरंत प्रभाव से वहां

पंप मोटर स्थापित कर जल निकासी की व्यवस्था की जा सके।

 

 

 

 

सिंचाई विभाग बाढ़ प्रबंधन के लिए पूरी तरह सतर्क है और सभी

आवश्यक संसाधन व टीमें अलर्ट मोड पर कार्य कर रही हैं।

निरीक्षण के दौरान सिंचाई विभाग के श्री प्रदीप (एस.डी.ओ.), श्री आशीष देशवाल

(एस.डी.ओ.), श्री शुभम (जे.ई.), श्री पवन (जे.ई.), श्री योगेश (जे.ई.) तथा

श्री रजनीश (जे.ई.) उपस्थित रहे।
जिला प्रशासन ने भी सभी संबंधित विभागों को चौकस रहने और

किसी भी आपात स्थिति में तत्काल प्रभाव से कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।

 

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