Charkhi Dadri News – अग्रोहा धाम में शरद पूर्णिमा के पावन अवसर पर आयोजित राष्ट्रीय स्तर के विशाल वार्षिक मेले में चरखी दादरी से अग्रवाल सभा (रजि.), चरखी दादरी के पदाधिकारियों, सदस्यों एवं अग्रबंधुओं ने उत्साहपूर्वक भागीदारी की।
अग्रवाल सभा के प्रवक्ता डॉ. ललित महाजन ने बताया कि मेले में शामिल होने के लिए चरखी दादरी से अग्रबंधु अग्रोहा धाम पहुंचे और महाराजा अग्रसेन जी के प्रति अपनी श्रद्धा व्यक्त की। इस अवसर पर समाज के लोगों में विशेष उत्साह देखने को मिला। अग्रबंधुओं ने इस आयोजन को सामाजिक एकता, आपसी भाईचारे और सांस्कृतिक विरासत को मजबूत करने वाला महत्वपूर्ण अवसर बताया।
अग्रोहा धाम में आयोजित राष्ट्रीय वार्षिक मेला वैश्य समाज की आस्था, गौरव, एकता और सांस्कृतिक पहचान का प्रतीक है। इस मेले में देशभर से बड़ी संख्या में श्रद्धालु, वैश्य समाज के प्रतिनिधि, व्यापारी, उद्योगपति, समाजसेवी और गणमान्य व्यक्ति भाग लेते हैं।
यह आयोजन न केवल धार्मिक आस्था का केंद्र है, बल्कि समाज को अपनी गौरवशाली परंपराओं, ऐतिहासिक विरासत और महापुरुषों के आदर्शों से जोड़ने का भी महत्वपूर्ण माध्यम है। ऐसे आयोजनों से समाज के लोगों को एक-दूसरे से मिलने, विचारों का आदान-प्रदान करने और सामाजिक कार्यों को नई दिशा देने का अवसर मिलता है।
कार्यक्रम में हिमाचल के राज्यपाल कवीन्द्र गुप्ता, हरियाणा कैबिनेट मंत्री विपुल गोयल, पंजाब कैबिनेट मंत्री बिजेंद्र गोयल, पूर्व राज्यसभा सांसद सुभाष चंद्रा , अग्रोहा विकास ट्रस्ट अध्यक्ष बजरंग दास गर्ग समेत देश विदेश से अनेक हस्तियों ने शिरकत की।
सभा प्रधान कैलाश चंद रिटोलिया एवं महासचिव विष्णु गोयल ने कहा कि महाराजा अग्रसेन जी ने समाज को एकता, समानता, परोपकार और भाईचारे की राह दिखाई। उनके विचारों की प्रासंगिकता आज भी बनी हुई है।
वर्तमान समय में समाज की उन्नति के लिए आवश्यक है कि सभी लोग आपसी मतभेदों से ऊपर उठकर एकजुट हों और शिक्षा, चिकित्सा, व्यापार, उद्योग तथा सामाजिक सेवा के क्षेत्र में मिलकर कार्य करें। उन्होंने कहा कि अग्रोहा धाम में आयोजित वार्षिक मेला समाज को अपनी जड़ों से जोड़ने के साथ-साथ नई पीढ़ी को महाराजा अग्रसेन जी के जीवन दर्शन से परिचित कराने का सशक्त माध्यम है।
सभा के उपप्रधान सतीश बजाज एवं कोषाध्यक्ष सुनील मित्तल ने कहा कि अग्रोहा धाम वैश्य समाज की ऐतिहासिक, धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान का प्रमुख केंद्र है। यह पावन स्थल महाराजा अग्रसेन जी की विरासत और उनके आदर्शों की याद दिलाता है।
मेले जैसे बड़े आयोजन समाज के लोगों में आपसी प्रेम, सद्भाव और संगठनात्मक एकता को बढ़ावा देते हैं। उन्होंने कहा कि वैश्य समाज ने व्यापार एवं उद्योग के साथ-साथ शिक्षा, चिकित्सा, धर्मार्थ कार्यों और जनसेवा के क्षेत्र में भी उल्लेखनीय योगदान दिया है। समाज की इस सेवा भावना को आगे बढ़ाना और जरूरतमंद लोगों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाना हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है।
उन्होंने कहा कि महाराजा अग्रसेन जी का जीवन समाजवाद, समानता, सहयोग, सेवा और मानवीय मूल्यों का अनुपम उदाहरण है। उन्होंने समाज में ऐसी व्यवस्था स्थापित करने का संदेश दिया, जिसमें प्रत्येक व्यक्ति को सम्मान के साथ आगे बढ़ने का अवसर मिले। उनके आदर्श आज भी समाज को परस्पर सहयोग, जरूरतमंदों की सहायता और सामूहिक उत्थान के लिए प्रेरित करते हैं। अग्रोहा धाम पहुंचकर मेले में भागीदारी करना प्रत्येक अग्रबंधु के लिए गर्व और सौभाग्य का विषय है।
अग्रोहा धाम में आयोजित मेले में चरखी दादरी के अग्रबंधुओं की सहभागिता सामाजिक एकजुटता, श्रद्धा और गौरव की भावना को दर्शाती है। सभी ने महाराजा अग्रसेन जी के आदर्शों पर चलते हुए सामाजिक सद्भाव, जनसेवा और समाज के सर्वांगीण विकास के लिए निरंतर कार्य करने का संकल्प व्यक्त किया।
इस अवसर पर चरखी दादरी से अधिवक्ता दिनेश गर्ग, राजकुमार मित्तल, नरेश सांपला, अंकित गुप्ता, मुकेश आदमपुरिया, गौरीशंकर सिंघल, विनोद गुप्ता, रितु गोयल, सरोज गर्ग, सुनीता आदमपुरिया एवं मधु गर्ग आदि अग्रबंधुओं ने अग्रोहा धाम पहुंचकर राष्ट्रीय वार्षिक मेले में भागीदारी की। सभी ने आयोजन के प्रति अपनी श्रद्धा एवं उत्साह व्यक्त करते हुए महाराजा अग्रसेन जी के आदर्शों को जन-जन तक पहुंचाने और समाज की एकता, सेवा तथा उत्थान के लिए मिलकर कार्य करने का संदेश दिया।
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