Charkhi Dadri News : बढ़ते साइबर अपराधों पर प्रभावी अंकुश लगाने एवं आमजन को सुरक्षित रखने के उद्देश्य से पुलिस महानिदेशक, हरियाणा श्री अजय सिंघल, भा.पु.से. द्वारा साइबर ठगी, डिजिटल अरेस्ट, फर्जी कॉल, ऑनलाइन फ्रॉड तथा अन्य साइबर अपराधों से बचाव हेतु जारी अभेद्य ऐप एवं डूअल ओटीपी सिस्टम के उपयोग को लेकर पुलिस अधीक्षक चरखी दादरी लोगेश कुमार ने एडवाइजरी जारी की ।
उन्होंने बताया कि वर्तमान डिजिटल युग में तकनीक के बढ़ते उपयोग के साथ-साथ साइबर अपराधों में भी तेजी से वृद्धि हो रही है। साइबर अपराधी विभिन्न माध्यमों जैसे फर्जी कॉल, व्हाट्सएप मैसेज, ईमेल, सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एवं नकली वेबसाइट्स के जरिए लोगों को ठगी का शिकार बना रहे हैं। ऐसे में आमजन के लिए सतर्कता एवं जागरूकता ही सबसे बड़ा बचाव है।
उन्होंने डिजिटल अरेस्ट जैसे नए प्रकार के साइबर अपराध के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि इसमें अपराधी स्वयं को पुलिस अधिकारी, सीबीआई या अन्य जांच एजेंसी का अधिकारी बताकर लोगों को डराते हैं और उन्हें वीडियो कॉल के माध्यम से “नजरबंद” होने का झूठा दावा करते हैं। इसके बाद वे व्यक्ति से पैसे ट्रांसफर करवाने या निजी जानकारी हासिल करने का प्रयास करते हैं। पुलिस अधीक्षक ने स्पष्ट किया कि इस प्रकार की कोई भी कार्रवाई वास्तविक पुलिस या सरकारी एजेंसी द्वारा इस तरीके से नहीं की जाती।
अभेद्य ऐप
उन्होंने बताया कि डिजिटल धोखाधड़ी, डिजिटल अरेस्ट और एक्सटॉर्शन कॉल्स (रंगदारी के लिए फोन) जैसे अपराधों से आमजन को सुरक्षित रखने के लिए पुलिस महानिदेशक, हरियाणा द्वारा जारी अभेद्य ऐप साइबर सुरक्षा के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण कदम है। यह ऐप उपयोगकर्ताओं को संदिग्ध कॉल, मैसेज एवं ऑनलाइन गतिविधियों के बारे में सचेत करता है तथा उन्हें सुरक्षित डिजिटल व्यवहार अपनाने में मदद करता है।
यह ऐप अंतरराष्ट्रीय, वर्चुअल या मास्क किए गए अनजान नंबरों से आने वाली संदिग्ध कॉल्स और व्हाट्सएप संदेशों को आप तक पहुंचने से पहले ही ब्लॉक कर देता है। जिससे अपराधियों द्वारा फैलाई जाने वाली दहशत और ब्लैकमेलिंग से बचाव होता है। भले ही कॉल आपके पास न पहुंचे, लेकिन बैकएंड पर पुलिस इन नंबरों का डेटा सुरक्षित रखती है ताकि अपराधियों को ट्रैक करके उन पर सख्त कार्रवाई की जा सके।
डुअल ओटीपी सिस्टम
उन्होंने बताया कि वर्तमान समय में साइबर अपराधी तकनीकी रूप से बैंक खातों को हैक करने के बजाय लोगों को मानसिक दबाव, भय, झूठे कानूनी मामलों, डिजिटल अरेस्ट, फर्जी निवेश योजनाओं तथा सरकारी अधिकारी बनकर प्रतिरूपण (इम्पर्सोनेशन) जैसे तरीकों से भ्रमित कर स्वयं उनसे ओटीपी साझा करवाकर ठगी की घटनाओं को अंजाम देते हैं। ऐसे मामलों में पारंपरिक एकल ओटीपी प्रणाली कई बार पर्याप्त सुरक्षा प्रदान नहीं कर पाती।
डूअल ओटीपी प्रणाली ऑनलाइन लेन-देन को अधिक सुरक्षित बनाती है, जिससे धोखाधड़ी की संभावना काफी हद तक कम हो जाती है।
इसमें किसी भी वित्तीय लेन-देन के दौरान दो स्तरों पर ओटीपी का सत्यापन आवश्यक होता है, जिससे अनधिकृत ट्रांजेक्शन की संभावना काफी कम हो जाती है।
यह प्रणाली विशेष रूप से 60 वर्ष या उससे अधिक आयु व 25 लख रुपए या उससे अधिक राशि जिनके खातों में जमा है खाताधारकों के लिए तैयार की गई है।
वरिष्ठ नागरिकों को इस धोखे से बचाने के लिए एचडीएफसी बैंक के सहयोग से डुअल ओटीपी सिस्टम शुरू किया गया है।
उन्होंने बताया कि बड़े फंड ट्रांसफर के दौरान, लेन-देन का ओटीपी केवल खाताधारक को ही नहीं, बल्कि उसके द्वारा चुने गए एक भरोसेमंद परिवार के सदस्य के मोबाइल नंबर पर भी भेजा जाएगा।
खाते से पैसा तभी ट्रांसफर होगा जब दोनों ओटीपी (खाताधारक और परिजन का) दर्ज किए जाएंगे। इससे परिवार के सदस्य अलर्ट हो जाते हैं और डर या जल्दबाजी में होने वाली आर्थिक ठगी तुरंत रुक जाती है। पुलिस अधीक्षक ने आमजन से अपील की कि वे जहां भी संभव हो, इस सुरक्षा सुविधा का उपयोग अवश्य करें।
एडवाइजरी में आमजन को निम्नलिखित महत्वपूर्ण सावधानियां बरतने की सलाह दी गई:
• किसी भी अज्ञात व्यक्ति को अपना ओटीपी, बैंक डिटेल्स, पासवर्ड या व्यक्तिगत जानकारी साझा न करें।
• फर्जी कॉल या मैसेज के माध्यम से मिलने वाले लालच, इनाम या डराने-धमकाने वाले संदेशों से सावधान रहें।
• किसी भी अनजान लिंक पर क्लिक न करें और संदिग्ध वेबसाइट्स से दूरी बनाए रखें।
• सोशल मीडिया पर अपनी निजी जानकारी सीमित रूप से साझा करें।
• केवल आधिकारिक एवं विश्वसनीय ऐप्स और वेबसाइट्स का ही उपयोग करें।
• बैंक या सरकारी अधिकारी बनकर आने वाली कॉल्स की सत्यता की जांच अवश्य करें।
पुलिस अधीक्षक ने कहा कि यदि किसी व्यक्ति को किसी भी प्रकार की साइबर ठगी का संदेह हो या वह इसका शिकार हो जाए, तो तुरंत राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर संपर्क करें या नजदीकी पुलिस थाना में सूचना दें। इसके अतिरिक्त साइबर क्राइम पोर्टल पर भी शिकायत दर्ज कराई जा सकती है, जिससे त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके।
उन्होंने बताया कि जिला पुलिस द्वारा समय-समय पर साइबर जागरूकता अभियान चलाए जा रहे हैं, जिनके माध्यम से स्कूलों, कॉलेजों, पंचायतों एवं शहरी क्षेत्रों में लोगों को जागरूक किया जा रहा है।
उन्होंने सभी नागरिकों से अपील की कि वे स्वयं जागरूक बनें और अपने परिवार, मित्रों एवं समाज के अन्य लोगों को भी साइबर सुरक्षा के बारे में जानकारी दें। विशेष रूप से बुजुर्गों एवं युवाओं को इस संबंध में जागरूक करना अत्यंत आवश्यक है, क्योंकि ये वर्ग अक्सर साइबर अपराधियों के निशाने पर रहते हैं।
उन्होंने कहा कि साइबर अपराधों की रोकथाम केवल पुलिस के प्रयासों से संभव नहीं है, बल्कि इसमें आमजन की सक्रिय भागीदारी भी आवश्यक है। जागरूकता ही सुरक्षा है, और इसी सिद्धांत को अपनाकर साइबर अपराधों से बचा जा सकता है।
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