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Breaking News : यूक्रेन युद्ध में हरियाणा के युवक की मौत 7 माह से परिवार से नहीं था संपर्क

Breaking News : हरियाणा के एक युवक की यूक्रेन युद्ध में मौत का मामला सामने आया है, जिससे पूरे क्षेत्र में शोक की लहर है।

गांव कुम्हारिया के रहने वाले दो युवकों को कथित तौर पर रूस की सेना में जबरन भर्ती कर युद्ध में भेजा गया था।

इनमें से एक युवक अंकित जांगड़ा की मौत हो गई है, जबकि उसका साथी विजय पूनिया अब भी लापता है।


अंकित जांगड़ा का शव दिल्ली पहुंच चुका है, जहां से परिजन उसे लेकर गांव पहुंचे।

शनिवार को गमगीन माहौल में उसका अंतिम संस्कार किया गया। अंतिम दर्शन के दौरान परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल हो गया और पूरे गांव में शोक का माहौल बन गया।


अंकित के भाई रघुबीर जांगड़ा ने बताया कि उन्हें शुक्रवार रात को इसकी सूचना मिली, जिसके बाद परिवार तुरंत दिल्ली के लिए रवाना हो गया।

उन्होंने बताया कि 11 सितंबर 2025 के बाद से ही अंकित और विजय का परिवार से कोई संपर्क नहीं हो पाया था।


परिजनों के अनुसार, दोनों युवकों को वापस लाने के लिए उन्होंने लगातार प्रयास किए।

वे दिल्ली और चंडीगढ़ में रूसी दूतावास, विदेश मंत्रालय और रक्षा मंत्रालय के चक्कर लगाते रहे, लेकिन कोई ठोस मदद नहीं मिल पाई।

दोनों युवकों ने पहले वीडियो जारी कर भारत सरकार से उन्हें बचाने की गुहार भी लगाई थी।


करीब 14 महीने पहले अंकित और विजय रोजगार की उम्मीद लेकर रूस गए थे।

परिजनों को यह अंदाजा भी नहीं था कि वे किसी धोखाधड़ी का शिकार हो जाएंगे और हालात इतने खराब हो जाएंगे कि उनकी सुरक्षित वापसी भी मुश्किल हो जाएगी।


जब अंकित का शव गांव पहुंचा तो वह कंकालनुमा हालत में ताबूत में बंद था। परिजनों का कहना है कि शव की स्थिति देखकर लगता है कि उसकी मौत काफी समय पहले हो चुकी थी।

तीन महीने पहले ही रूस स्थित भारतीय दूतावास ने डीएनए जांच के लिए परिवार के सदस्यों के सैंपल भी मंगवाए थे।


रघुबीर ने बताया कि अंकित ने पहले ही संकेत दे दिया था कि उसे जबरन युद्ध में धकेला जा रहा है।

पिछले सात महीनों से संपर्क टूटने के बाद परिवार को उसकी हालत को लेकर आशंका हो गई थी।

उसकी सुरक्षित वापसी के लिए जंतर-मंतर पर धरना भी दिया गया, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई।


जिस ताबूत में अंकित का शव आया, उसमें रूसी सेना की वर्दी भी रखी गई थी। इसे देखकर परिजन आक्रोशित हो गए और अंतिम संस्कार के दौरान उस वर्दी को भी चिता में जला दिया।


गांव के ही रहने वाले सोनू ने बताया कि वह भी स्टडी वीजा पर रूस गया था, लेकिन वह एक महिला के झांसे में नहीं आया और सुरक्षित वापस लौट आया।

उसने बताया कि उसी महिला ने अंकित, विजय और अन्य भारतीय युवकों को नौकरी का लालच देकर फंसाया और बाद में उन्हें जबरन रूसी सेना में भर्ती कर दिया गया।


रघुबीर के अनुसार, अंकित ने 12वीं पास करने के बाद परिवार की मदद के लिए 14 फरवरी 2025 को स्टडी वीजा पर रूस का रुख किया था।

उसने मॉस्को के एमएसएलयू कॉलेज में विदेशी भाषा कोर्स में दाखिला लिया और साथ ही खर्च चलाने के लिए एक रेस्टोरेंट में काम भी शुरू कर दिया था।


वहीं विजय पूनिया भी पहले स्टडी वीजा पर रूस गया था। वीजा खत्म होने पर वह वापस लौटा, फिर दोबारा गया और बाद में बिजनेस वीजा पर फिर से रूस चला गया। अब उसका कोई पता नहीं चल पा रहा है।


11 सितंबर 2025 को जारी एक वीडियो में अंकित ने बताया था कि उन्हें धोखे से सेना में भर्ती कर ट्रेनिंग के बाद यूक्रेन बॉर्डर भेजा जा रहा है।

उसने कहा था कि उन्हें युद्ध के लिए मजबूर किया जा रहा है और मना करने पर जान से मारने की धमकी दी जा रही है।

वीडियो में अन्य भारतीय युवक भी दिखाई दिए थे, जिन्होंने अपनी पहचान बताकर मदद की अपील की थी।

अंकित ने वीडियो में कहा था कि यह शायद उनका आखिरी संदेश हो सकता है और “बचा लो… हम कभी भी मारे जा सकते हैं।”


अंकित की मौत से पूरा गांव सदमे में है। ग्रामीणों और परिजनों ने स्थानीय प्रशासन, राज्य सरकार और केंद्र सरकार से मदद की गुहार लगाई थी, लेकिन उनका कहना है कि समय रहते कोई कार्रवाई नहीं हुई।

गांव के सरपंच सुरेश सिंह ने भी इस घटना पर दुख जताते हुए कहा कि पूरा गांव पीड़ित परिवार के साथ खड़ा है।

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