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Charkhi Dadri News – जिला कष्ट निवारण समिति की बैठक में प्रवेश रोकने का आरोप, INLD नेता राहुल मराठा ने सरकार और प्रशासन पर उठाए सवाल

Charkhi Dadri News – जिला कष्ट निवारण समिति की कार्यप्रणाली को लेकर इंडियन नेशनल लोकदल के वरिष्ठ नेता राहुल मराठा ने सरकार और प्रशासन पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने आरोप लगाया कि जनता की समस्याओं के समाधान के लिए गठित समिति अब जनसमस्याओं के निवारण के बजाय सवाल उठाने वालों को ही बाहर रखने का माध्यम बनती जा रही है।

राहुल मराठा का दावा है कि शहर की बुनियादी समस्याओं को समिति की बैठकों में उठाने के बाद से उन्हें लगातार बैठक में प्रवेश करने से रोका जा रहा है। उन्होंने 27 अक्टूबर को आयोजित बैठक में भी प्रवेश नहीं दिए जाने का आरोप लगाते हुए इसे लोकतांत्रिक व्यवस्था और जनसुनवाई की भावना के विपरीत बताया।

राहुल मराठा ने कहा कि उन्होंने 23 जुलाई को आयोजित बैठक में पार्किंग व्यवस्था, नए सचिवालय के पास प्रस्तावित सड़क, झाड़ू सिंह चौक से परशुराम चौक होते हुए पुरानी अनाज मंडी तक सड़क की समस्या तथा शहर में बरसाती पानी की निकासी जैसे महत्वपूर्ण जनहित के मुद्दे उठाए थे। उनके अनुसार, इन समस्याओं पर अपेक्षित कार्रवाई और समाधान के बजाय उन्हें ही विरोध का सामना करना पड़ा। उन्होंने आरोप लगाया कि 25 अगस्त की बैठक में उनका नाम हटाया गया और इसके बाद भी उन्हें समिति की बैठकों में शामिल होने से रोका जा रहा है।


राहुल मराठा ने आरोप लगाया कि बैठक के दौरान स्थानीय विधायक ने उनके द्वारा उठाए गए मुद्दों पर आनाकानी की। इस पर उन्होंने कड़ा विरोध जताते हुए कहा कि जब जनसमस्याओं पर चर्चा हो रही हो तो बिना आवश्यकता बीच में बोलने के बजाय समस्याओं के समाधान पर ध्यान दिया जाना चाहिए।

उन्होंने जिला कष्ट निवारण समिति के चेयरमैन डॉ. अरविंद शर्मा की भूमिका पर भी सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि उन्हें जनसमस्याओं पर निष्पक्ष सुनवाई के बजाय विधायक के पक्ष में बोलता हुआ महसूस हुआ। राहुल मराठा के मुताबिक, उन्हें जवाब देने के बजाय यह तक कहा जाता है कि उनका सामाजिक मुद्दों से कोई लेना-देना नहीं है।

उन्होंने सवाल उठाया कि यदि शहर की सड़क, पार्किंग और जल निकासी जैसी समस्याएं उठाना सामाजिक सरोकार नहीं है, तो फिर जनहित के मुद्दे उठाने का अधिकार किसे है? राहुल मराठा ने आरोप लगाया कि जिला कष्ट निवारण समिति की बैठकें केवल औपचारिकता बनकर रह गई हैं और जमीनी समस्याओं के समाधान को लेकर सरकार की गंभीरता पर सवाल खड़े हो रहे हैं।

उन्होंने कहा कि समिति का उद्देश्य आम नागरिकों की शिकायतों को सुनना, संबंधित अधिकारियों से जवाब लेना और समस्याओं का समयबद्ध समाधान सुनिश्चित करना है। यदि शिकायतकर्ता और जनहित के मुद्दे उठाने वाले लोगों को ही बैठक में प्रवेश नहीं मिलेगा, तो आम जनता अपनी बात आखिर कहां रखेगी? उन्होंने कहा कि चरखी दादरी में सड़क, जलभराव, पार्किंग और बरसाती पानी की निकासी जैसी समस्याएं आज भी समाधान की प्रतीक्षा कर रही हैं। प्रदेश और केंद्र में भाजपा की सरकार तथा विधानसभा क्षेत्र में भाजपा के प्रतिनिधि होने के बावजूद जनता को बुनियादी सुविधाओं के लिए संघर्ष करना पड़े, तो सरकार के विकास और जवाबदेही के दावों की समीक्षा होनी चाहिए।


राहुल मराठा ने मांग की कि उनका नाम समिति से हटाने और लगातार बैठकों में प्रवेश नहीं दिए जाने के कारणों को सार्वजनिक किया जाए। उन्होंने सवाल उठाया कि यह निर्णय किसके निर्देश पर लिया गया और क्या इसके पीछे कोई राजनीतिक दबाव या सहमति थी?

उन्होंने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच करवाने तथा जनहित के मुद्दों पर खुली और निष्पक्ष सुनवाई सुनिश्चित करने की मांग की। राहुल मराठा ने स्पष्ट कहा कि जनता की समस्याओं को उठाना किसी राजनीतिक दल के विरुद्ध व्यक्तिगत लड़ाई नहीं, बल्कि जनप्रतिनिधियों और प्रशासन की जवाबदेही तय करने का लोकतांत्रिक माध्यम है।

उन्होंने चेतावनी दी कि यदि जनहित के सवाल उठाने वालों की आवाज दबाने और उन्हें जनसुनवाई के मंच से दूर रखने का सिलसिला जारी रहा, तो वे इस मुद्दे को लोकतांत्रिक तरीके से जनता के बीच लेकर जाएंगे। उन्होंने कहा कि जनता को आश्वासन नहीं, समाधान चाहिए और जनसुनवाई के मंच पर सवालों से बचने के बजाय उनका जवाब दिया जाना चाहिए।

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