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Charkhi Dadri News – 79 वर्षीय रामफल फौगाट ने वेदान्ता हाफ मैराथन में लहराया परचम, 75+ आयु वर्ग में हासिल किया चौथा स्थान

Charkhi Dadri News – उम्र महज एक संख्या है, यदि मन में कुछ कर गुजरने का जुनून हो तो बढ़ती उम्र भी हौसलों के आगे घुटने टेक देती है। इस कहावत को चरितार्थ कर रहे हैं गांव कमोद, जिला चरखी दादरी निवासी 79 वर्षीय धावक रामफल फौगाट, जिन्होंने दिल्ली के जवाहरलाल नेहरू स्टेडियम में आयोजित विश्वस्तरीय वेदान्ता हाफ मैराथन में शानदार प्रदर्शन कर न केवल अपने गांव, बल्कि पूरे हरियाणा का नाम रोशन किया है।

उनकी उपलब्धि इस बात का प्रमाण है कि दृढ़ इच्छाशक्ति, अनुशासन और निरंतर अभ्यास के बल पर उम्र के किसी भी पड़ाव पर नई उपलब्धियां हासिल की जा सकती हैं। विश्वस्तरीय वेदान्ता हाफ मैराथन में लगभग 40 हजार से अधिक धावकों ने भाग लिया। प्रतियोगिता में रामफल फौगाट ने 10 किलोमीटर की दौड़ को 1 घंटा, 5 मिनट और 33 सेकंड में पूरा किया।

75 वर्ष से अधिक आयु वर्ग में उन्होंने चौथा स्थान हासिल कर अपनी प्रतिभा और शारीरिक क्षमता का परिचय दिया। दौड़ का शुभारंभ सुबह 7 बजकर 35 मिनट पर जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला की उपस्थिति में हुआ।

इतनी बड़ी अंतरराष्ट्रीय स्तर की खेल प्रतियोगिता में 79 वर्ष की उम्र में शीर्ष चार धावकों में स्थान बनाना अपने आप में उल्लेखनीय उपलब्धि है। रामफल फौगाट की खेल यात्रा केवल एक प्रतियोगिता तक सीमित नहीं है। वह अब तक विभिन्न प्रतियोगिताओं में कुल 113 पदक अपने नाम कर चुके हैं। इनमें 8 अंतरराष्ट्रीय स्तर, 5 राष्ट्रीय स्तर और 100 मास्टर वेटरन वर्ग के पदक शामिल हैं।

वर्ष 2018 में एयरटेल दिल्ली हाफ मैराथन की 10 किलोमीटर दौड़ में भी उन्होंने अपना समय रिकॉर्ड दर्ज कराया था। उनकी उपलब्धियों के लिए ग्राम पंचायत कमोद और फौगाट खाप द्वारा पहले भी सम्मानित किया जा चुका है। आज उन्हें ओल्ड बॉय के नाम से भी पहचान मिल रही है, जो उनकी जीवटता और खेल के प्रति समर्पण का प्रतीक बन चुका है।

हरियाणा दिवस पर होगा सम्मान
सर्वजातीय फौगाट खाप के प्रधान सुरेश फौगाट ने रामफल फौगाट की उपलब्धि पर गर्व व्यक्त करते हुए कहा कि 79 वर्ष की उम्र में भी उन्होंने जिस उत्साह, मेहनत और लगन के साथ खेल के मैदान में अपनी पहचान बनाई है, वह पूरे समाज के लिए प्रेरणादायक है। उन्होंने कहा कि रामफल फौगाट ने फौगाट खाप ही नहीं, बल्कि पूरे हरियाणा का मान बढ़ाया है।

इसी गौरवपूर्ण उपलब्धि के सम्मान में 1 नवंबर को हरियाणा दिवस पर सर्वजातीय फौगाट खाप द्वारा आयोजित सम्मान समारोह में उन्हें सम्मानित किया जाएगा। सुरेश फौगाट ने हरियाणा सरकार से मांग की कि ऐसे प्रतिभाशाली और समर्पित वरिष्ठ खिलाड़ी को आर्थिक सहायता प्रदान करने के साथ उचित राजकीय सम्मान भी दिया जाए।

उन्होंने कहा कि रामफल फौगाट जैसे खिलाड़ी समाज की अमूल्य धरोहर हैं। उनकी उपलब्धियों को पहचान और प्रोत्साहन मिलने से युवाओं को खेलों के प्रति प्रेरित किया जा सकता है तथा वरिष्ठ नागरिकों में भी स्वस्थ जीवनशैली अपनाने का संदेश पहुंचेगा।

उन्होंने यह भी कहा कि रामफल फौगाट का नाम गांव कमोद के गौरव पट पर अंकित किया जाना चाहिए, ताकि आने वाली पीढि़यां उनके संघर्ष, उपलब्धियों और समर्पण से प्रेरणा ले सकें। रामफल फौगाट की उपलब्धि का संदेश स्पष्ट है कि सपनों को पूरा करने के लिए उम्र नहीं, हौसलों की जरूरत होती है।

जब 79 वर्ष का धावक दौड़ के मैदान में नई मिसाल कायम कर सकता है, तो युवाओं के सामने भी मेहनत, अनुशासन और निरंतर प्रयास से सफलता हासिल करने की असीम संभावनाएं हैं। रामफल फौगाट की दौड़ केवल 10 किलोमीटर की दूरी तय करने की कहानी नहीं, बल्कि यह विश्वास जगाने वाली यात्रा है कि हौसले बुलंद हों तो उम्र कभी मंजिल तक पहुंचने का रास्ता नहीं रोक सकती।

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