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Charkhi Dadri : फास्टैग से 55 रुपये की गलत कटौती पर एनएचएआई पर 45 हजार का जुर्माना

Charkhi Dadri :- के जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने फास्टैग से 55 रुपये की गलत कटौती के मामले में नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (एनएचएआई) पर 45 हजार रुपये का जुर्माना लगाया है।

आयोग ने इसे सेवा में गंभीर कमी मानते हुए शिकायतकर्ता को मुआवजा देने के निर्देश दिए।क्या था मामला?विद्या विहार कॉलोनी निवासी अविरल गुप्ता ने अपनी कार के लिए एक बैंक से फास्टैग जारी कराया था। 17 फरवरी 2025 को उनके खाते से बुचावास टोल प्लाजा के नाम पर 55 रुपये काट लिए गए, जबकि वाहन वहां से गुजरा ही नहीं था ।

उन्होंने बैंक के कस्टमर केयर और सोशल मीडिया के माध्यम से शिकायत दर्ज कराई, लेकिन समाधान नहीं मिला। इसके बाद उन्होंने उपभोक्ता आयोग में याचिका दायर की।सुनवाई के दौरान क्या हुआ?मामले की सुनवाई में एनएचएआई की ओर से कोई प्रतिनिधि उपस्थित नहीं हुआ, जिसके चलते आयोग ने एकपक्षीय कार्रवाई की ।

आयोग के अध्यक्ष मंजीत सिंह नरयाल ने अपने आदेश में कहा कि वाहन के टोल प्लाजा पर न होने के बावजूद राशि काटना केवल तकनीकी त्रुटि नहीं , बल्कि सेवा में बड़ी लापरवाही है । आयोग ने यह भी स्पष्ट किया कि संबंधित बैंक केवल भुगतान माध्यम (पेमेंट गेटवे) की भूमिका में था ,

इसलिए उसे तकनीकी गलती के लिए जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता। बैंक के खिलाफ शिकायत खारिज कर दी गई।आयोग के आदेश14 जनवरी को दिए गए फैसले में आयोग ने एनएचएआई को निर्देश दिया कि 55 रुपये की कटौती 12 प्रतिशत वार्षिक ब्याज सहित वापस की जाए ।

इसके अलावा:मानसिक पीड़ा और उत्पीड़न के लिए 25 हजार रुपयेकानूनी खर्च के लिए 10 हजार रुपयेफास्टैग प्रणाली में लापरवाही रोकने के उद्देश्य से 10 हजार रुपये राज्य आयोग के कानूनी सहायता खाते में जमा कराने के निर्देशआयोग ने कहा कि आदेश का पालन 45 दिनों के भीतर किया जाए , अन्यथा मुआवजे की राशि पर 15 प्रतिशत वार्षिक ब्याज देना होगा।आयोग की टिप्पणीआदेश में कहा गया कि भले ही विवादित राशि 55 रुपये जैसी छोटी हो , लेकिन इससे जुड़ा सिद्धांत महत्वपूर्ण है ।

शिकायत प्रक्रिया की जटिलता के कारण कई उपभोक्ता छोटी रकम की गलत कटौतियों को नजरअंदाज कर देते हैं।

आयोग ने माना कि स्पष्ट त्रुटियों के लिए सरल और स्वचालित रिफंड प्रणाली न होना उपभोक्ताओं के हितों के खिलाफ है।

आयोग ने यह भी कहा कि क्षतिपूर्ति का उद्देश्य दंडात्मक और निवारक होना चाहिए, ताकि भविष्य में ऐसी लापरवाही दोहराई न जाए ।

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