Charkhi Dadri पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट के आदेशों की पालना करते हुए दादरी जिला प्रशासन ने गांव पिचौपा कलां में स्थित खनन क्षेत्र को पूरी तरह बंद कर दिया है।
उपायुक्त के नेतृत्व में प्रशासनिक टीम ने मौके पर पहुंचकर सीलिंग की प्रक्रिया को अंजाम दिया।
सोमवार देर रात उपायुक्त द्वारा गांव में पहुंचकर प्रारंभिक कार्रवाई शुरू की गई थी, जबकि मंगलवार को प्रशासनिक व पुलिस अधिकारियों की मौजूदगी में खनन क्षेत्र को पूर्ण रूप से सील कर दिया गया। सील किए गए क्षेत्र की निगरानी के लिए पुलिस बल की तैनाती भी कर दी गई है, ताकि किसी भी प्रकार की छेड़छाड़ न हो सके।
मंगलवार को उपायुक्त डॉ. मुनीष नागपाल के साथ जिला परिषद के सीईओ डॉ. विरेंद्र सिंह, खनन अधिकारी सांची तलवार, जिला राजस्व अधिकारी राजकुमार भौरिया तथा बाढड़ा डीएसपी सुभाष चंद्र मौके पर पहुंचे।
हाई कोर्ट के निर्देशानुसार खसरा नंबर 109 व 110 में स्थित खनन क्षेत्र के मुख्य प्रवेश मार्गों को जेसीबी मशीन की सहायता से खुदाई कर बंद किया गया, जिससे आगामी आदेशों तक क्षेत्र की स्थिति यथावत बनी रहे।
ग्रामीणों ने लगाए नियमों से अधिक खनन के आरोप
प्रशासन की कार्रवाई की सूचना मिलते ही गांव पिचौपा कलां के ग्रामीण भी मौके पर एकत्र हो गए।
ग्रामीणों संजय, राजेश और भीम सिंह सहित अन्य लोगों ने आरोप लगाया कि खसरा नंबर 109 व 110 के पहाड़ी हिस्से में केवल सीमित क्षेत्र में खनन की अनुमति थी, लेकिन संबंधित माइनिंग कंपनी ने तय सीमा से कहीं अधिक क्षेत्र में अवैध रूप से खनन किया। इसी मामले में हाई कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है।
पूरा मामला क्या है
गांव पिचौपा कलां में संचालित धर्मपाल स्टोन क्रशर के संचालक व अन्य की ओर से हाई कोर्ट में याचिका दायर की गई थी।
याचिका में दादा दोहला स्टोन माइंस पर आरोप लगाया गया कि कंपनी ने स्वीकृत सीमा से बाहर जाकर खसरा नंबर 109 व 110 में खनन किया है।
मामले की जांच के लिए अधिवक्ता कंवल गोयल को लोकल कमिश्नर नियुक्त किया गया था।
लोकल कमिश्नर की रिपोर्ट में सामने आया कि निर्धारित नौ सीमा स्तंभों में से केवल छह ही मौके पर मौजूद पाए गए, जबकि तीन पूरी तरह से गायब थे।
रिपोर्ट के आधार पर हाई कोर्ट ने इसे प्राकृतिक संसाधनों के दुरुपयोग और पर्यावरण को गंभीर नुकसान पहुंचाने का मामला मानते हुए कड़ा संज्ञान लिया।
अदालत ने दादरी के उपायुक्त को 48 घंटे के भीतर पूरा क्षेत्र सील करने, वीडियोग्राफी कराने और पर्यावरण मंत्रालय को पक्षकार बनाकर सुधारात्मक कदम उठाने के निर्देश दिए थे।
पहले भी उठ चुका है अवैध खनन का मुद्दा
गौरतलब है कि गांव पिचौपा कलां के निवासी लंबे समय से यहां कथित अवैध खनन को लेकर विरोध जताते आ रहे हैं।
यह विषय दादरी में आयोजित जिला कष्ट निवारण समिति की बैठकों में भी कई बार उठाया जा चुका है।
ग्रामीणों की ओर से अवैध खनन और भूजल दोहन पर रोक लगाने, नियमानुसार मुआवजा दिलाने, पिचौपा से शीशवाला तक पक्की सड़क निर्माण तथा बंद रास्तों को पुनः चालू कराने जैसी मांगें रखी गई थीं।
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