New Delhi : गुरुग्राम में चार वर्षीय बच्ची से दुष्कर्म के मामले की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने पुलिस और मजिस्ट्रेट की कार्यप्रणाली पर सख्त टिप्पणी की है। अदालत ने कहा कि इस मामले में जिस तरह से जांच की गई, वह बेहद चिंताजनक और असंवेदनशीलता को दर्शाती है।
मुख्य न्यायाधीश की अगुवाई वाली पीठ ने सुनवाई के दौरान पाया कि मजिस्ट्रेट ने मासूम बच्ची से आरोपी की मौजूदगी में सवाल-जवाब किए और उस पर बार-बार सच बताने का दबाव बनाया। अदालत ने इस प्रक्रिया को गलत बताते हुए कहा कि ऐसे मामलों में बच्चे की मानसिक स्थिति और सुरक्षा का विशेष ध्यान रखा जाना चाहिए।
कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि पॉक्सो कानून के तहत किसी भी स्थिति में आरोपी को पीड़ित बच्चे के सामने या उसके आसपास नहीं रखा जाना चाहिए। यह पूरी तरह से नियमों के खिलाफ है।
सुनवाई के दौरान पुलिस की भूमिका पर भी सवाल उठाए गए। अदालत ने कहा कि यदि किसी कारण से शिकायत दर्ज नहीं हुई थी, तब भी पुलिस को अपने स्तर पर तुरंत एफआईआर दर्ज करनी चाहिए थी।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इस तरह के संवेदनशील मामलों में जांच एजेंसियों और न्यायिक अधिकारियों को अधिक सतर्कता और संवेदनशीलता के साथ काम करना चाहिए।
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