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Charkhi Dadri News: वार्डों में अधूरे कामों के बावजूद भुगतान का आरोप, पार्षदों ने उठाई विजिलेंस जांच की मांग

चरखी दादरी। नगर परिषद क्षेत्र में चल रहे विकास कार्यों को लेकर एक बार फिर विवाद गहराता नजर आ रहा है। शहर के पांच पार्षदों ने चेयरमैन और संबंधित अधिकारियों पर अनियमितता व भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगाए हैं।

शुक्रवार को पार्षद एकजुट होकर नगर परिषद कार्यालय पहुंचे और पूरे मामले पर आपत्ति दर्ज करवाई।
पार्षदों का कहना है कि कई वार्डों में विकास कार्य अभी अधूरे हैं, इसके बावजूद ठेकेदारों को पूरा भुगतान कर दिया गया।

उनका आरोप है कि संबंधित वार्ड के पार्षद के हस्ताक्षर के बिना ही भुगतान स्वीकृत कर दिया गया, जिससे पारदर्शिता पर सवाल खड़े होते हैं।

पार्षदों ने यह भी कहा कि बार-बार मांगने के बावजूद उन्हें संबंधित फाइलें नहीं दिखाई जा रही हैं, जिससे संदेह और बढ़ रहा है।


नगर परिषद कार्यालय में इस मुद्दे को लेकर चर्चा के दौरान माहौल गरमा गया। पार्षद मनोज वर्मा, जयसिंह लांबा, विनोद सिंहमार, नवीन प्रजापति और पार्षद प्रतिनिधि विरेंद्र चरखी ने चेयरमैन से जवाब मांगा।

बाद में चेयरमैन ने एमई और जेई को मौके पर बुलाया। बातचीत के दौरान पार्षदों और अधिकारियों के बीच तीखी नोकझोंक भी हुई।

जेई सौहार्द ने कहा कि नियमों के अनुसार भुगतान से जुड़े दस्तावेजों पर संबंधित वार्ड पार्षद के हस्ताक्षर अनिवार्य नहीं हैं।

उन्होंने यह भी बताया कि संबंधित कर्मचारी फिलहाल फील्ड में हैं और सोमवार को फाइलें दिखा दी जाएंगी।


वार्ड 20 के पार्षद प्रतिनिधि विरेंद्र चरखी ने आरोप लगाया कि निर्माण कार्यों में घटिया सामग्री का प्रयोग किया गया है।

कई स्थानों पर गलियां और नालियां टूट चुकी हैं। उनका कहना है कि कार्यों की जानकारी पार्षदों को समय पर नहीं दी जाती और ठेकेदार मिलीभगत कर बिल पास करवा लेते हैं।

उन्होंने दावा किया कि स्वीकृत राशि का केवल एक हिस्सा ही काम पर खर्च होता है, शेष राशि में अनियमितता होती है।
पार्षद विनोद सिंहमार ने बताया कि उनके वार्ड में करीब 40 लाख रुपये से नौ गलियों का निर्माण प्रस्तावित था, लेकिन कई स्थानों पर काम अधूरा है।

कुछ जगह टाइलें भी उखड़ने लगी हैं। उन्होंने कहा कि भुगतान उनकी जानकारी के बिना कर दिया गया और फाइल दिखाने की मांग के बावजूद टालमटोल किया जा रहा है।


पार्षद नवीन प्रजापति, जयसिंह लांबा और मनोज वर्मा ने मांग की कि पूरे मामले की विजिलेंस जांच करवाई जाए। उन्होंने कहा कि निर्माण सामग्री के बिलों का वास्तविक उपयोग से मिलान होना चाहिए।

साथ ही नगर परिषद द्वारा करवाए जा रहे कार्यों की पूरी जानकारी पार्षदों को दी जानी चाहिए।
चेयरमैन का पक्ष
चेयरमैन बक्शीराम सैनी ने पार्षदों के आरोपों को निराधार बताया।

उनका कहना है कि नियमों के तहत संबंधित वार्ड पार्षद के हस्ताक्षर जरूरी नहीं होते। उन्होंने कहा कि जहां भी काम अधूरा है, उसे पूरा करवाया जाएगा। पार्षद यदि किसी फाइल को देखना चाहते हैं तो वे कभी भी देख सकते हैं।

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