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Breaking News : हरियाणा में रफ्तार का कहर: सड़क हादसों में बढ़ीं मौतें, दोपहिया सवार सबसे ज्यादा शिकार….

Breaking News : हरियाणा में सड़क हादसों को लेकर हालात लगातार गंभीर बने हुए हैं। तेज रफ्तार वाहन लोगों की जान के लिए बड़ा खतरा बनते जा रहे हैं। ओवरस्पीडिंग के कारण सबसे ज्यादा दुर्घटनाएं हो रही हैं और इसके आंकड़े चिंता बढ़ाने वाले हैं।

सड़क दुर्घटनाओं में सबसे अधिक प्रभावित दोपहिया वाहन चालक और पैदल यात्री हो रहे हैं। वर्ष 2023 में देशभर में हुए हादसों में करीब 66 प्रतिशत मौतें दोपहिया सवारों की हुईं। वहीं 30 प्रतिशत पैदल चलने वाले लोग तेज गति के कारण अपनी जान गंवा बैठे। इसके अलावा लगभग 4 प्रतिशत साइकिल सवार भी दुर्घटनाओं का शिकार हुए।

यह खुलासा भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) खड़गपुर के सिविल इंजीनियरिंग विभाग के प्रोफेसर और सड़क सुरक्षा विशेषज्ञ भार्गव मैत्रा द्वारा 2020 से 2023 के बीच किए गए अध्ययन में सामने आया है।

प्रोफेसर मैत्रा के अनुसार, सड़क हादसों को कम करने के लिए सबसे जरूरी कदम वाहनों की गति को नियंत्रित करना है। उन्होंने कहा कि जब तक राज्यों में प्रभावी स्पीड मैनेजमेंट लागू नहीं किया जाता, तब तक हादसों पर अंकुश लगाना मुश्किल रहेगा। वर्तमान में गति नियंत्रण के ठोस इंतजामों की कमी के चलते असुरक्षित सड़क उपयोगकर्ताओं—जैसे पैदल यात्री, साइकिल और दोपहिया चालक—की मौतों का आंकड़ा लगभग 69.9 प्रतिशत तक पहुंच गया है।

अध्ययन के अनुसार, सड़क दुर्घटनाओं में असुरक्षित लोगों की मौतों का प्रतिशत 2020 में 61.4%, 2021 में 67%, 2022 में 66.8% और 2023 में बढ़कर 67.9% हो गया।

मैत्रा ने पश्चिम बंगाल में स्पीड कंट्रोल नीति लागू करने के लिए सुझाव दिए थे, जिसे पिछले साल वहां लागू कर दिया गया है। अब वे उत्तर प्रदेश और ओडिशा के लिए भी इसी तरह की नीति पर काम कर रहे हैं।

चंडीगढ़ में आयोजित दो दिवसीय कार्यशाला के दौरान उन्होंने हरियाणा के संदर्भ में भी स्पीड कंट्रोल नीति लागू करने की जरूरत पर जोर दिया। उन्होंने राज्य के सबसे अधिक दुर्घटनाग्रस्त 2-3 मार्गों के अध्ययन की मांग की है।

देशभर में सड़क हादसों के आंकड़ों पर नजर डालें तो स्थिति लगातार बिगड़ती दिख रही है। वर्ष 2020 में 3,72,181 हादसों में 1,38,383 लोगों की मौत हुई थी, जिनमें 84,932 असुरक्षित सड़क उपयोगकर्ता थे। 2021 में 4,12,432 दुर्घटनाओं में 1,53,972 लोगों की जान गई और 1,03,211 असुरक्षित लोग मारे गए।

2022 में हादसों की संख्या बढ़कर 4,61,312 हो गई, जिनमें 1,68,491 मौतें दर्ज की गईं और 1,12,558 असुरक्षित लोग शामिल थे। 2023 में 4,80,583 सड़क हादसों में 1,72,890 लोगों की मौत हुई, जिनमें 1,17,320 असुरक्षित सड़क उपयोगकर्ता थे।

हरियाणा की बात करें तो यहां भी दुर्घटनाओं का ग्राफ ऊपर ही जा रहा है। वर्ष 2020 में 9,431 हादसे हुए, जिनमें 4,507 लोगों की मौत और 7,659 लोग घायल हुए।

2021 में 9,933 दुर्घटनाओं में 4,706 मौतें और 8,121 घायल दर्ज किए गए। 2022 में 10,429 हादसों में 4,915 लोगों की जान गई और 8,619 घायल हुए। वहीं 2023 में 10,463 सड़क दुर्घटनाओं में 4,968 मौतें और 8,346 लोग घायल हुए।

कुल मिलाकर, आंकड़े साफ संकेत दे रहे हैं कि सड़क सुरक्षा के लिए सख्त कदम उठाना बेहद जरूरी हो गया है।

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