चरखी दादरी। दादरी-चिड़िया-कनीना सड़क निर्माण में अनियमितता को लेकर दर्ज शिकायत की जांच के तहत भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी), पंचकूला की टीम मंगलवार को दूसरी बार दादरी पहुंची। टीम ने लोक निर्माण विभाग के अधिकारियों, ठेकेदार और शिकायतकर्ता की मौजूदगी में सड़क निर्माण में इस्तेमाल सामग्री के नमूने अलग-अलग स्थानों से एकत्र किए।
इस बार जांच प्रक्रिया को पारदर्शी बनाए रखने के लिए शिकायतकर्ता अधिवक्ता प्रवीण तक्षक को भी मौके पर साथ रखा गया। साथ ही भिवानी से आई निगरानी टीम ने पूरी कार्रवाई पर नजर रखी। टीम ने सड़क की विभिन्न परतों की जांच की, टाइल वर्क की स्थिति देखी और मशीनों के माध्यम से नमूने निकालकर उनकी मोटाई की पैमाइश की।
कई गांवों से लिए गए सैंपल
एसीबी की टीम एक्सईएन जयसिंह के नेतृत्व में गांव मकड़ाना, मकड़ानी, चिड़िया, रामनगर और मोड़ी पहुंची। गांव मकड़ानी से एक, चिड़िया से दो सीसी सड़क के नमूने लिए गए। इसके अलावा रामनगर में तारकोल सड़क तथा मोड़ी में इंटरलॉक टाइलों के नीचे से सैंपल निकाले गए। सभी नमूनों को जांच के लिए एफएसएल भेजा जाएगा।
हर बिंदु पर हुई गहन पड़ताल
मंगलवार दोपहर करीब 12 बजे टीम रामनगर से मोड़ी की ओर जाने वाले मार्ग पर पहुंची। यहां चार स्थानों से मशीन द्वारा सैंपल निकाले गए। प्रत्येक सैंपल की तीन-तीन बार माप लेकर औसत निकाली गई। इस दौरान अधिकारियों और शिकायतकर्ता पक्ष के अधिवक्ताओं—प्रवीण तक्षक, प्रदीप कालीरमण और विकास महला—के बीच प्रत्येक बिंदु पर चर्चा हुई और पूरा विवरण दर्ज किया गया।
शिकायत के बाद दोबारा हुई जांच
गौरतलब है कि इससे पहले 4 फरवरी को भी एसीबी टीम ने सैंपल लिए थे। शिकायतकर्ता का आरोप था कि उस दौरान बिना सूचना दिए और कथित रूप से सुरक्षित स्थानों से नमूने उठाए गए। इस शिकायत पर उच्चाधिकारियों ने संज्ञान लेते हुए दोबारा जांच के आदेश दिए, जिसके तहत मंगलवार को पुनः सैंपलिंग की गई। शिकायतकर्ता का कहना है कि जांच एजेंसियों और स्थानीय स्तर पर हुई लापरवाही पर अभी भी सवाल बने हुए हैं।
वीडियोग्राफी के बीच हुई सैंपलिंग
इस बार पूरी प्रक्रिया की वीडियोग्राफी कराई गई। चार अलग-अलग जगहों से मशीन के माध्यम से सड़क के सैंपल निकाले गए, जबकि मोड़ी गांव में सीसी सड़क के साथ लगी टाइलों के नीचे से भी नमूने जुटाए गए।
मामला क्या है
लोक निर्माण विभाग द्वारा दादरी-रोहतक और दादरी-कनीना स्टेट हाईवे का पुनर्निर्माण कराया जा रहा है, जिस पर करीब 63.67 करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं। इसी निर्माण कार्य में कथित अनियमितताओं को लेकर शिकायत दर्ज कराई गई थी।
विभाग का पक्ष
स्टेट विजिलेंस टीम के एक्सईएन जयसिंह ने बताया कि शिकायतकर्ता द्वारा बताए गए स्थानों से ही सैंपल लिए गए हैं। सभी नमूनों को एफएसएल भेजा जाएगा और रिपोर्ट के आधार पर ही आगे की कार्रवाई तय होगी। रिपोर्ट आने में लगभग छह महीने का समय लग सकता है।

